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शनिवार, 12 मई 2018

हर दोपाया आदम नही


नही कहा जा सकता
हर हाड़ मांस वाले
दो हाथो और दो पाये वाले को
इंसान

और भी बहुत कुछ  चाहिये
दो हाथों दो पैरों
पांच इन्द्रियों
और शेष वो सब
जिससे मिल कर बने ढाँचे को
सम्बोधित कर सकती है दुनिया
मानव योनि 
के अलावा

भले ही
मानव योनि में जन्म
होता हो
पूर्व कर्मों का फल
किन्तु मानव रचना को
इंसान कहलाने के लिये
गुजरना होता है
एक सतत प्रकिया से
बनना पड़्ता है वो कमल
जो रखता है
स्वच्छ स्वयं को
कीचड़ मे भी
नही होती प्रभावित रचं मात्र भी
उसकी कोमलता
उसकी सुगंध और
उसके सदगुण

भला कैसे कहा जा सकता है
हाड़ मांस वाले
दोपाये को इंसान
जिसके अंतर्मन में घर बना चुके हो
द्वेषईर्ष्यादंभ
जिसकी सोच में हो कपट
जिसकें कर्म हो अमानवीय
और जिसके हदय में हो छल

वो पुष्प
जो आकार में कमल सा हो 
किन्तु
उपजे हो नुकीले कांटे
आती हो दुर्गंध
पत्थर जैसी हो कठोरता
और
हो अंधेरें सा कालापन
नही कहलायेगा 
कमल
नही चढेगा पूजा में

आकॄति के आधार पर 
नही हो सकती गुणों की माप 
अन्यथा
एक ही कहलाते
देव और दैत्य 

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-05-2017) को "माँ है अनुपम" (चर्चा अंक-2970) ) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. मानव हिंदी का शब्द है जिसे अरबी या उर्दू में इंसान कहते हैं.....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Neeti ji , Thanks
      But here I used the term "Manav Rachna" and I think that a human body can be called as huamn when inside that humanity resides.

      हटाएं
  3. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 15/05/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सटीक और गहन अंतर तक उतरती रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्तम लेखनअपर्णा जी शुभकानाएं

    उत्तर देंहटाएं
  6. पूर्व जन्म की संकल्पना कोरी कपोल कल्पना जैसी लगती है ।

    बाकी जिसमें इंसानियत हो वो इंसान कहलवाए जाएंगे।

    अच्छी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  7. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    उत्तर देंहटाएं

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